हर सागर के दो किनारे होते है,
कुछ लोग जान से भी प्यारे होते है,
ये ज़रूरी नहीं हर कोई पास हो,
क्योंकी जिंदगी में यादों के भी सहारे होते है !
दिलको हमसे चुराया आपने ,
दूर होकर भी अपना बनाया आपने,
कभी भूल नहीं पायेंगे हम आपको,
क्योंकि याद रखना भी तो सिखाया आपने.
याद करते है तुम्हे तनहाई में,
दिल डूबा है गमो की गहराई में,
हमें मत धुन्ड़ना दुनिया की भीड़ में,
हम मिलेंगे में तुम्हे तुम्हारी परछाई में.
मौत के बाद याद आ रहा है कोई,
मिट्ठी मेरी कबर से उठा रहा है कोई,
या खुदा दो पल की मोहल्लत और दे दे,
उदास मेरी कबर से जा रहा है कोई.
दर्द को दर्द से न देखो,
दर्द को भी दर्द होता है,
दर्द को ज़रूरत है दोस्त की,
आखिर दोस्त ही दर्द में हमदर्द होता है!
सांसो का पिंजरा किसी दिन टूट जायेगा
फिर मुसाफिर किसी राह में छूट जायेगा
अभी साथ है तो बात कर लिया करो
क्या पता कब साथ छूट जायेगा
क़यामत तक तुझे याद करेंगे
तेरी हर बात पर एतरार करेंगे
तुम्हे याद करने को तो नहीं कहेंगे
फिर भी आप करना चाहे तो इनकार नहीं करेंगे,,,,,,,,,,,,,??????
Saturday, 28 November 2009
Friday, 27 November 2009
2६/११ हमलो के बाद क्या हम सुरक्षित है ,,,.........????
आज २६/११ हमलों के हुए पूरा एक साल हो गया! हमारे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आंतकियों द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा हमला था,परन्तु अब भी हमारे ज़हन में एक ही सवाल उठता है क्या हम सुरक्षित है,क्या भारत अब भी रहने के लिए सुरक्षित स्थान है! और यह सवाल हमें रह रह कर कचोटता है! अगर हम पिछले एक दशक की बात कर तो हमारे देश में कुल छोटे बड़े ३१०० आतंकवादी हमले हो चुके है, जिनमें लगभग ४७५०० लोगो को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा! आये दिन हमारे देश में बम धमाके होते रहते है और हमारी सरकार मूक दर्शक बन कर तमाशा देखती रही है ! पिछले एक साल में हमारे देश में ८४१ सिपाहियों ने आतंक से लोहा लेते हुए अपने प्राण न्योच्वर कर दिए ! आज हमारे देश के रक्षक ही सुरक्षित नहीं है तो क्या हम सुरक्षित है? ये अपने आप में ही एक बहुत बड़ा सवाल है ? और इसके पीछे कही न कही हमारी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है! हमारे देश में आतंकवाद विरोधी क़ानूनों का अभाव है POTA जैसे क़ानूनों को यूपीए सरकार ने निरस्त कर दिया,क्यों क्योंकि ये कानून उनहीं के लिए मुसीबत का कारण बन रह है,कही न कही सख्त कानून का अभाव भी आंतकवादियो के होंसले बुलंद करने में मदद करता है!
आतंकवादी समय-२ पर अपनी नीतियों में बदलाव करते रहते है नये -२ हथियारों का प्रयोग करते है prntu हम आज भी १९६० या १९८० के दशक की बंदुको या हथियारों का प्रयोग कर रहे है,हमे अगर आतंकवाद से मुकाबला करना है तो समय-२ अपनी नीतियों में बदलाव के साथ, समीक्षा भी करनी होगी! आज हमारे देश में लगभग ७०० व्यक्तियों की सुरक्षा का ज़िम्मा एक पुलिसवाले के हाथ में है ,हमारे देश में लगभग अभी १.५०००० पुलिस कर्मचारियों के जरूरत है! मुंबई जैसे बड़े महानगरों में जिनको जनसंख्या करोड़ो में है, इनकी सुरक्षा का ज़िम्मा कुछ सो पुलिशवालो के हाथ में है !अगर हमे आतंकवाद को जड़ से उखड फेंकना है तो हमे एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ना होगा, तभी हम आंतकवाद से कुछ हद तक पार पा सकेंगे!
विनोद ठाकुर
आज २६/११ हमलों के हुए पूरा एक साल हो गया! हमारे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आंतकियों द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा हमला था,परन्तु अब भी हमारे ज़हन में एक ही सवाल उठता है क्या हम सुरक्षित है,क्या भारत अब भी रहने के लिए सुरक्षित स्थान है! और यह सवाल हमें रह रह कर कचोटता है! अगर हम पिछले एक दशक की बात कर तो हमारे देश में कुल छोटे बड़े ३१०० आतंकवादी हमले हो चुके है, जिनमें लगभग ४७५०० लोगो को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा! आये दिन हमारे देश में बम धमाके होते रहते है और हमारी सरकार मूक दर्शक बन कर तमाशा देखती रही है ! पिछले एक साल में हमारे देश में ८४१ सिपाहियों ने आतंक से लोहा लेते हुए अपने प्राण न्योच्वर कर दिए ! आज हमारे देश के रक्षक ही सुरक्षित नहीं है तो क्या हम सुरक्षित है? ये अपने आप में ही एक बहुत बड़ा सवाल है ? और इसके पीछे कही न कही हमारी सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है! हमारे देश में आतंकवाद विरोधी क़ानूनों का अभाव है POTA जैसे क़ानूनों को यूपीए सरकार ने निरस्त कर दिया,क्यों क्योंकि ये कानून उनहीं के लिए मुसीबत का कारण बन रह है,कही न कही सख्त कानून का अभाव भी आंतकवादियो के होंसले बुलंद करने में मदद करता है!
आतंकवादी समय-२ पर अपनी नीतियों में बदलाव करते रहते है नये -२ हथियारों का प्रयोग करते है prntu हम आज भी १९६० या १९८० के दशक की बंदुको या हथियारों का प्रयोग कर रहे है,हमे अगर आतंकवाद से मुकाबला करना है तो समय-२ अपनी नीतियों में बदलाव के साथ, समीक्षा भी करनी होगी! आज हमारे देश में लगभग ७०० व्यक्तियों की सुरक्षा का ज़िम्मा एक पुलिसवाले के हाथ में है ,हमारे देश में लगभग अभी १.५०००० पुलिस कर्मचारियों के जरूरत है! मुंबई जैसे बड़े महानगरों में जिनको जनसंख्या करोड़ो में है, इनकी सुरक्षा का ज़िम्मा कुछ सो पुलिशवालो के हाथ में है !अगर हमे आतंकवाद को जड़ से उखड फेंकना है तो हमे एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ना होगा, तभी हम आंतकवाद से कुछ हद तक पार पा सकेंगे!
विनोद ठाकुर
Monday, 23 November 2009
सोचों दुनिया लड़कियों के बिना
हमारे समाज में एक कहावत है के नारी ममता की मूर्ति है ,लेकिन सोचों अगर ये मूर्त ही न रही तो हम पर अपनी ममता कौन न्योछावर करेगा! आज नारी पर बढते ज़ुल्म इस बात का सबूत है एक दिन संसार से नारी का निशान ही मिट जायेगा! आज के समय में हर ७७ मिनटों बाद एक नारी दहेज़ के कारण प्रताड़ित की जा रही है ,हर २९ मिनट बाद घरेलू हिंसा का शिकार बन रही है! अगर इसी तरह नारी का शोसन होता होता रहा तो हमें भविष्य में भयंकर परिणामों का सामना कर पद सकता है ! आज हर साल लगभग २०००० हज़ार नारिया बलात्कार का शिकार हो रही रही!
और इसी तरह से से चलता रहा तो २०२० में भारत में लगभग कुवारे रह जायेगे और भविष्य में ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है ! हर साल हजारों लड़कियाँ पैदा होने से पहले ही मार दी जाती है !
और इसी तरह से से चलता रहा तो २०२० में भारत में लगभग कुवारे रह जायेगे और भविष्य में ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है ! हर साल हजारों लड़कियाँ पैदा होने से पहले ही मार दी जाती है !
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